47 साल पहले विभाग ने गलत जमीन पर सड़क बनाई, अब सही जगह बना रहे पीडब्ल्यूडी ने कहा- हमें खेद है

हरियाणा के लोक निर्माण विभाग ने माना कि उसने 47 साल पहले घरौंडा से गगसीना जाने वाली एक किमी लंबी सड़क गलत जगह बना दी थी। विभाग ने गलती स्वीकार करते हुए गुरुवार को पहले से तय जगह पर सड़क बनाने का काम शुरू किया। दरअसल यह मामला घरौंडा-गगसीना मार्ग के चौड़ीकरण के दौरान किसानों के विरोध और उनके ज्यादा मुआवजा मांगे जाने पर सामने आया। किसान अपनी मांगों को लेकर कोर्ट चले गए। जहां फिर रिकॉर्ड देखने पर इस गलती का पता चला। 


पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने बताया है कि हमें खेद है कि 1973 में विभाग की गलती के कारण सड़क एक किलोमीटर तक गलत जगह बन गई थी, जिसे अब सही जगह बना रहे हैं। लगभग पांच दशक बाद विभाग ने करनाल सेशन कोर्ट के आदेश पर गुरुवार को सड़क शिफ्टिंग का कार्य शुरू किया। इस दौरान मजिस्ट्रेट खुद मौजूद रहे। 


रिकॉर्ड में ऐसे गलती आई सामने


2016 में सरकार ने घरौंडा-गगसीना मार्ग के चौड़ीकरण की योजना तैयार की थी। फुरलक गांव तक सड़क चौड़ी भी हुई, लेकिन गगसीना और फुरलक गांव के बीच लगते खेतों के मालिकों ने भूमि देने के एवज में मुआवजे की मांग करते हुए केस कर दिया। चार साल से निर्माण का कार्य अधूरा पड़ा हुआ था। कोर्ट के आदेश पर पीडब्ल्यूडी विभाग ने सड़क की चौड़ाई देखने के लिए रिकॉर्ड को खंगाला तो पता चला कि इस सड़क का लगभग एक किलोमीटर हिस्सा गलत जगह पर है। कोर्ट ने जनवरी 2019 में सड़क को वास्तविक जगह पर शिफ्ट करने के आदेश दिए थे, लेकिन विभाग ने अब काम शुरू किया है। इसके पूरा होने से घरौंडा से गगसीना की दूरी करीब ढाई सौ मीटर कम होगी।


किसानों ने विरोध जताया 
उधर, जिस किसान के खेत से नई सड़क बनाई जा रही है, उसने सरकारी अमले को देखकर विरोध जताया। इस दौरान गांव के कई लोग एकत्रित हो गए। किसान भूपेंद्र पान्नु ने आरोप लगाया कि सड़क शिफ्ट करने के लिए उनकी खड़ी फसल काट दी गई है। अधिकारियों ने उन्हें कोई दस्तावेज नहीं दिखाए और न ही फसल काटने का समय दिया गया। हम इसके खिलाफ कोर्ट जाएंगे। पीडब्ल्यूडी के एसडीओ दिलबाग मेहरा ने कहा कि कोर्ट के फैसले के अनुसार सड़क को वास्तविक जगह पर शिफ्ट किया जा रहा है।


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फोल्डेबल फोन अपनी फ्लेक्सिबल स्क्रीन को लेकर काफी चर्चा में हैं। मोटोरोला, सैमसंग और हुवावे अपने फोल्डेबल स्क्रीन वाले फोन बाजार में उतार चुकी हैं। हाल ही में टीसीएल ने भी अपने फ्लेक्सिबल स्क्रीन वाले दो मॉडल पेश किए, जिसमें ट्राई-फोल्ड फोन-टैबलेट हाइब्रिड और रोलेबल डिस्प्ले कॉन्सेप्ट शामिल हैं। दोनों ही अपने लुक्स और डिजाइन कि वजह से सुर्खियों में हैं। ट्राई-फोल्ड फोन-टैबलेट हाइब्रिड अंग्रेजी के Z लेटर की तरह दो बार फोल्ड होता है वहीं रोलेबल डिस्प्ले कॉन्सेप्ट देखने में रेगुलर स्मार्टफोन की तरह लगता है लेकिन अपने रोलेबल मैकेनिज्म की बदौलत स्क्रीन का कुछ हिस्सा अपने अंदर छिपा लेता है। कंपनी का कहना है कि यह रोलेबल डिस्प्ले मैकेनिज्म से फोन के स्क्रीन पर पड़ने वाली क्रिज (निशान) बिल्कुल भी नहीं दिखता। इन दोनों मॉडल को मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2020 में पेश किया जाना था लेकिन इवेंट कैंसिल होने की वजह से फिलहाल इनकी लॉन्चिंग कुछ समय के लिए टाल दी गई है। कंपनी ने इनकी कीमत, स्पेसिफिकेशन और उपलब्धता के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी है। ट्राई फोल्ड और रोलेबल डिस्प्ले कॉन्सेप्ट फोन के खास फीचर्स टीसीएल ट्राई-फोल्ड फोन-टैबलेट हाइब्रिड कॉन्सेप्ट कंपनी की ऑफिशियल प्रेस रिलीज के मुताबिक, टीसीएल ट्राई-फोल्ड फोन-टैबलेट हाइब्रिड कॉन्सेप्ट में 6.65 इंच का एमोलेड डिस्प्ले है, जो पूरी तरह से अनफोल्ड होने पर 10 इंच के डिस्प्ले में कन्वर्ट हो जाता है। इसके कवर डिस्प्ले में 20.8:9 अस्पेक्ट रेशो और 3K रेजोल्यूशन का सपोर्ट मिलता है। कंपनी ने बताया कि इसके वर्किंग प्रोटोटाइप मॉडल को तैयार करने के लिए इसमें ड्रैगनहिंज और बटरफ्लाई हिंज टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। फोन एक क्रिज से हुवावे मैट एक्स और दूसरे क्रिज से सैमसंग गैलेक्सी फोल्ड कि तरह फोल्ड होता है। रोलेबल डिस्प्ले कॉन्सेप्ट रोलेबल डिस्प्ले कॉन्सेप्ट देखने में किसी रेगुलर फोन की तरह ही लगता है। इसमें मोटोराइज्ड मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया गया है। रोल करने पर यह स्क्रीन का कुछ हिस्सा अपने अंदर छिपा लेता है जबकि मोटोराइज्ड मैकेनिज्म एक्टिवेट करने पर फोन की स्क्रीन का छिपा हुआ हिस्सा दोबारा बाहर निकल आता है। इसमें 6.75 इंच का फ्लेक्सिबल एमोलेड डिस्प्ले है, जो बाहर निकलने पर 7.8 इंच के टैबलेट साइज डिस्प्ले में कन्वर्ट हो जाता है। टैबलेट मोड में इस्तेमाल न करने पर इसकी मोटर ऑटोमैटकली स्क्रीन को अंदर कर इसे रेगुलर फोन में बदल देती है।
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